दीपावली
आई दिवाली दिए जल उठे चारों ओर उजाला है,
मधुर सुहाने मौसम में मन हुआ मतवाला है,
क्या बच्चे क्या बूढ़े सबकी ख़ुशी का रंग निराला है,
आज फटेंगे खूब पटाखे नहीं कोई रोकने वाला है,
नए कपडे खील खिलौना और संग में खूब मिठाई,
धन और वैभव की देवी की आज है पूजा भाई,
कहीं हवन है और कहीं है पूजा बज रहे हैं शंख,
सभी झुके हैं मां के आगे राजा हो या रंक |
- राज कुमार दुबे
3 नवम्बर 1999
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