कहावत है क्या आवश्यकता आविष्कार की जननी है यही कारण था कि प्राचीन काल में मानव जाति के विभिन्न समूहों ने अपने समूह के व्यक्तियों से वैचारिक आदान-प्रदान अर्थात संप्रेषण हेतु भाषाओं का आविष्कार किया और यह भाषाएं उनकी संस्कृति के पोषक और प्रचारक बनी भले ही भाषाओं की लिपि बोलने का ढंग अलग अलग थे लेकिन लेकिन इसका उद्देश्य समान कालांतर में इन समूहों के आपस में संपर्क में आने के कारण कुछ प्राचीन भाषाएं आवश्यकतानुसार नवीन भाषा में परिवर्तित हो गई
भाषा की दृष्टि से भारत विश्व का सबसे समृद्ध राष्ट्र इसका सबसे बड़ा प्रमाण संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्द 22 भारतीय भाषाएं हैं इनके अलावा भी भारत में इस अनुसूची में शामिल होने के लिए प्रयासरत हैं शायरी विश्व का कोई अन्य राष्ट्र जिस में इतनी अधिक भाषाएं उसके निवासियों के विचारों की संवाहक हो समस्त भारतीय भाषाओं की अनूठी विशेषता यह है यह स्वास्थ्य भाषाएं प्राचीनतम भारतीय भाषा संस्कृत से ही निकले हैं संस्कृत को भारतीय संस्कृति में देव भाषा का दर्जा प्राप्त है समस्त भारतीय भाषाओं की लिपि बोलने का ढंग अलग अलग होने के बावजूद इन सब की आत्मा एक ही के कारण इनमें पारस्परिक जुड़ाव भी हैं
भाषाई व सांस्कृतिक दृष्टि से सशक्त भारत पर सैकड़ों वर्षो तक विदेशियों द्वारा शासन किए जाने के कारण विदेशी शासकों का प्रभाव भारतीय जनमानस पर पड़ा मुगल काल में इन्हीं कारणों से एक नई भाषा उर्दू का प्रादुर्भाव भारत में हुआ जो कि मुस्लिम समुदाय की लोकभाषा बन गई इसके बाद लगभग 200 वर्षों तक अंग्रेजों के भारत में रहने के कारण अंग्रेजी भाषा का भारतीय समुदाय पर गहरा प्रभाव पड़ा उस समय के तथाकथित बुद्धिजीवी और राजनेता अंग्रेजी से इतने प्रभावित थे के बे इसे हिंदी से अधिक तवज्जो देते थे
अंग्रेजी शासन की शिक्षा पद्धति और उनकी नीतियों तथा उच्च स्तर के भारतीय समाज के अंधानुकरण के कारण भारतीयों में आंग्ल भाषा के प्रति उत्साह पैदा हुआ तथा भारतीय भाषाओं के प्रति हीनता का जन्म हुआ जो के आज तक जारी है इस हीनता बोध के कई कारण रहे-
1. लगभग 200 वर्षों तक संपूर्ण भारत पर अंग्रेजों का शासन रहा उनकी कामकाज की भाषा अंग्रेजी थी उन्होंने इसे प्रचारित और प्रसारित किया
2. अंग्रेजों द्वारा 2 शिक्षा व्यवस्था लागू की गई उसमें अंग्रेजी को प्राथमिकता दिया जाने के कारण भारतीय भाषा भाषी और अंग्रेजी भाषा बोलने बालों के बीच एक खाई बनी इसका एक प्रमुख कारण यह भी था अंग्रेजी पद्धति से पढ़ने वालों को उच्च पद मिलते थे जब के अंग्रेजी न जानने वालों को निम्नतम पद मिलते
3. अंग्रेजी ने साहित्य भारत को दिया उसमें उन्होंने अपनी भाषा अपनी संस्कृति और अपनी सभ्यता को भारतीय भाषा संस्कृति और सभ्यता से श्रेष्ठ बताया जिससे भारतीयों में अंग्रेजी सभ्यता और संस्कृति के प्रति लगा व बड़ा
4. तथाकथित प्रगतिशील भारतीयों ने अंग्रेजों के इस कुत्सित प्रयास में उनका साथ दिया जिससे उन्हें फायदा मिला हिंदी भारतीय भाषा वासियों को हीनता का बोध होने लगा
5. आजादी की बात भारतीय सरकारों ने भी आशा को प्राथमिकता दी जिससे वह अभिजात्य वर्ग की भाषा बन गई
6. व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की पढ़ाई अंग्रेजी भाषा में होने के कारण
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